आज फिर हम लेकर आये है आपके के ही बीच के एक छात्र की कविता, इत्मिनान से पढ़े और अपने विचार हमे enlightenbrains@gmail.com पर अवश्य भेजे |

इंसानियत

इक मिट्टी से बने है पुतले , इक मिट्टी में मिल जायंगे |

कोई धनी है कोई भिखारी , धन का है ये खेल सब भाई |

कोई पढ़ा है कोई लिखा है , नजाने कोन कहा मिटा है |

कोई बड़ा है कोई छोटा है , ऊपर जाकर कोण पूछा है |

जिन्दा में है चंदे बंगले , कोन चला है इनको संग ले |

जिन्दा है तो खेल रे जंग में , मुर्दा में क्या बचा है संग में |

क्या स्वर्ग है क्या नर्क है , जाना तो है एक ही तर्क है |

कोई मांगे है धन की भूमि , कोई न जाने क्या है भूमि |

  • जगरूप अहिरवार

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