नमस्कार दोस्तों ! आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ, आपके शहर सागर के दो युवाओ की लिखी कविताएँ | पढ़िए और अपने मित्रो के साथ साझा कीजिये…..

महंगाई

इस महंगाई ने तो बड़ा गज़ब कर दिया,

मियाँ-बीवी के बीच में झगडा पैदा कर दिया |

नमक है तो मिर्ची नहीं, मिर्ची है तो हल्दी नहीं,

हल्दी है तो धनिया नहीं….

इन सब कमियों को देखकर बीवी ने एकदम फ़ौरन आर्डर कर दिया |

इस महंगाई………..

स्नो-पाउडर, बोरोप्लस, शैम्पू, नथनी हो बाज़ार का

बेहोश मिया होश मैं आकर दो-चार बात कर दिया |

इस महंगाई ने तो बड़ा गजब कर दिया………

  • दुर्गेश सरयाम

 

स्नेह

एक फूल ने बोला माली से,

मुझे दूर न कर इस डाली से |

भटक जाऊंगा इन राहों पर,

फिर न मिल पाऊँगी इस डाली से |

इस दुःख को तू न जान सके,

तू न इसको कभी मान सके |

 जान से प्यारी हूँ मैं इसकी,

ईमान से प्यारी हूँ मैं इसकी |

टूट कर बिखर जाऊगी मैं,

फिर कभी न सवर पाऊँगी मैं |

  • जगरूप अहिरवार

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